शुक्रवार, 19 सितंबर 2025

Nothing secret from God

 


NOTHING SECRET FROM GOD


World will be moving like this only Oppressed ones will keep on Tolerating strong 

You let flourish

 Tyranny and oppression 

When will You favor me?


I had been annoyed with You 

Now, nothing will be

 Kept secret from You 

I started folding my hands, in prayer Happiness will be my

 Permanent companion now.

-Dr. Anju Dua Gemini

Halt a bit

 



HALT A BIT

O, God!

Halt a bit,

 I will meet You

 After sometime 

Over here, silence is not

 Stretching in me

*Tip-tip cheen-cheen koo-koo pee-pee


All are striking sweet notes

 Breeze is embracing me

 Nobody is allowing me to dive

 Into silence and silence in me

O, my God! Halt a bit.


*Tip-tip cheen-cheen koo-koo pee-pee: chirping of various birds

-Dr. Anju Dua Gemini




3 लघुकथाएँ


 
डॉ. अंजु दुआ जैमिनी

-

1. इत्मीनान

"यार! किस बेवकूफ ने शहर के बीचों-बीच शमशान बनवा दिया?"

"क्यों, क्या हुआ, तुम्हें क्या तकलीफ है?"

"कुछ नहीं यार, बस आते-जाते कोई-न-कोई - अर्थी दिख ही जाती है।"

"अरे यार! मृत्यु अंतिम सत्य है, इस सत्य से घबराना कैसा।"

"ठीक है लेकिन जिस दिन ऊपर की कमाई करके आता हूँ या कोई गलत काम करके आता हूँ और उस दिन अर्थी दिख जाती है तो मूड खराब हो जाता है, मृत्यु याद आ जाती है।"

-

"हाँ, तो मत किया कर गलत काम, या रास्ता बदल लें।"

और अगले दिन उसने रास्ता बदल लिया।


2. शून्य-बोध

आदमी ने औरत से कहा- "सारा सामान बाँध लो, हम ये मोहल्ला छोड़ कर सोसायटी में अपने फ्लैट में शिफ्ट कर रहे हैं। ये जगह अब रहने लायक नहीं रही, नरक है नरक। यहाँ लोग छोटी-छोटी बात पर लड़ने लगते हैं, दम घुटता है मेरा।"

औरत ने सामान बाँध लिया और वे सोसायटी के शानदार फ्लैट में रहने लगे।

आदमी अपने भाग्य पर इतरा रहा था- "यहाँ सब कुछ है, कोई चिल्ल-पाँ नहीं।"

औरत के मुँह से एक भी शब्द नहीं फूटा और वह शून्य में घूरने लगी।


3. सुरक्षा

"अरी रधिया! तू अपनी बेटी को अपने साथ काम पर ले जाती है! ठीक है, पर सुना है तूने जवान बेटी को शर्मा के घर लगवाया है? तुझे नहीं पता कि उस शर्मा की नीयत ठीक नहीं है?" मुनिया बाई ने अपनी साथिन रधिया बाई से पूछा।

"जानती हूँ बहना, पर क्या करूं? कोई चारा भी


नहीं। घर पर उसे छोड़ती हूँ तो बाप-भाई बैठे हैं उसे खाने को, इसीलिए साथ ले आती हूँ। बीच-बीच में शर्मा के घर झाँक आती हूँ। कम-से-कम लड़की आँखों के सामने तो बनी रहती है।" रधिया बाई ठंडी साँस भरते हुए बोली।
-डॉ अंजु








बुधवार, 17 सितंबर 2025

काम करने के बाद आराम जरूरी


 सावधान! विश्राम!

बचपन में स्कूल में परेड करते हुए ‘सावधान! विश्राम!’ का प्रयोग बहुत किया है। पेट तना हुआ, सीना उठा हुआ, कंधे पीछे की ओर, नजर सामने। इस स्थिति को सावधान कहते हैं। इस स्थिति में अधिक देर तक खड़े रहना संभव नहीं होता। उसके बाद ‘विश्राम’ सुनने की प्रतीक्षा रहती है। ‘विश्राम’ कानों से टकराते ही कमर से ऊपर का हिस्सा हम हिलाते-डुलाते रहते थे। यही ‘परेड’ है। दाएँ मुड़, बाएँ मुड़, पीछे मुड़, कदमताल, तेज चल, ठहर, खड़े हो, मार्च पास्ट--- ये सभी शब्द परेड के दौरान प्रयोग किए जाते हैं। 

जीवन ‘परेड’ ही है। उम्र के प्रत्येक पड़ाव पर विभिन्न परिस्थितियों से आँखें दो-चार होती हैं। कभी हम दाएँ मुड़ते हैं तो कभी बाएँ, कभी सावधान की मुद्रा में आ जाते हैं तो कभी विश्राम की मुद्रा में, कभी तीव्र गति से चलते हैं तो कभी मंथर गति से। जो लोग इन शब्दों के साथ कदमताल नहीं कर पाते वे स्वयं को हारा हुआ महसूस करते हैं, ठगा हुआ महसूस करते हैं, छला हुआ महसूस करते हैं। उन्हें लगता है कि वे लगातार काम कर रहे हैं, नाम कमा रहे हैं इसके बावजूद कोई भी उन्हें नोटिस नहीं कर रहा। फिर वे ऊल-जलूल हरकतें करके लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं। वे स्वयं को विशिष्ट महसूस करवाना चाहते हैं। वे ‘अटेंशन सीकर’ होते हैं। वे चाहते हैं कि लोग उनकी बात सुनें, उनकी ‘हाँ में हाँ’ मिलाएँ। 

उनके चाहने वाले उनकी बात सुनते भी हैं लेकिन समस्या तब उत्पन्न होती हैं जब वे शिकायत करने लगते हैं कि कोई उनकी बात नहीं सुनता, कोई उनकी बात नहीं मानता। वस्तुतः वे कहना चाहते हैं कि अब उन्हें कोई प्यार नहीं करता। यही क्षण ‘अवसाद’ के हैं। यदि आपका कोई अपना ऐसी स्थिति में आ गया है तो सावधान हो जाइए और उसे विश्राम की स्थिति में ले आइए। 

अवसादित व्यक्ति वस्तुएँ उठा कर पटकने लगता है, जोर-जोर से चिल्लाने लगता है ताकि उसकी जायज अथवा नाजायज बात मान ली जाए। यदि ऐसी स्थिति किसी अपने की हो जाए तो आपको उसकी हरसंभव मदद करनी चाहिए। उसे विश्वास दिलाना चाहिए कि आप उसके साथ हैं। उसे प्रेम की सहलाहट चाहिए ताकि उसकी बौखलाहट कम हो सके और जीवन के प्रति उसकी उकताहट कम हो सके। आज मनोचिकित्सकों के पास ऐसे रोगियों की भीड़ बढ़ती जा रही है। 

मैं बार-बार ‘अति’ से दूर रहने की बात पर जोर देती हूँ। व्यवहार में अति नहीं होनी चाहिए। इसे ऐसे समझा जा सकता है-

एक गोल घेरा है। उसके बीचोंबीच एक लकीर खिंची है। हमें अपने व्यवहार का टिकाव उस लकीर के बीचोंबीच रखना है। जैसे-जैसे आप उस लकीर से दूर होते जाएँगे आपका व्यवहार असामान्य होता जाएगा। असामान्य व्यवहार करने वाला व्यक्ति डरा हुआ होता है, वह क्रोध में पागल हो जाता है, उत्तेजना से काँपने लगता है, सामने वाले पर हमला कर सकता है, अपने-आप को हानि पहुँचा सकता है। वह परिस्थितियों का सामना करने से डरता है। भयभीत होता है लोगों से, कुंठित होता है। 

इस समस्या का समाधान है। 

डायरी के पन्नों पर मन में उमड़-घुमड़ रहे विचार उड़ेल दिए जाएँ। जब-जब भीतर छटपटाहट हो, घर के एक कोने में चले जाना चाहिए और डायरी पर तनाव को उकेरते जाना चाहिए फिर डायरी जब भर जाए तो उसका एक-एक पन्ना फाड़ते चले जाना चाहिए और ‘स्वाहा स्वाहा’ कह कर उसे आग के हवाले करते जाना चाहिए। सब ठीक है, सब ठीक होगा, ऐसा मन-ही-मन कहना चाहिए। समय के साथ बहना चाहिए क्योंकि यदि उसके रास्ते में अवरोध बने तो जीर्ण-शीर्ण हुए बिना न रहोगे।

समय के अंतराल पर यारों-दोस्तों से मिलना बहुत जरूरी है फिर नितांत अपने के सामने दिल का हाल उड़ेलना भी जरूरी है। 

इन सबके अतिरिक्त ‘मौन’ भी बहुत मददगार होता है। ‘मौन’ धारण करने से आंतरिक शक्ति बढ़ती है। हमें शब्दों के अपव्यय से बचना चाहिए। ‘वाचालता’ और ‘चुप्पी’ दोनों ही स्थितियाँ घातक हैं क्योंकि दोनों ही मन को अस्थिर करती हैं। खुश रहने का अर्थ शांत रहना भी है। अधिक वाचाल और अधिक शांत लोग खुश होने में कंजूसी दिखाते हैं।   

मन को स्थिर करना है, तन को हिलाना-डुलाना है। सावधान और विश्राम दोनों ही जरूरी हैं। असामान्य को सामान्य करने में अधिक समय लगता है, अधिक श्रम लगता है, अधिक साहस लगता है इसलिए शुरू में ही संभल जाना चाहिए। 

हमें खतरे की आहट पहचान लेनी होगी। भीतरी उमड़-घुमड़ को अपनों के साथ बाँट लेना चाहिए। कहा भी गया है कि अगर दिल खोला होता अपनों के साथ तो डाक्टर क्यों खोलता अस्पताल में। चुनौतियाँ तो जीवन-भर साथ रहेंगी, यह तो हमें तय करना है कि इनसे लड़ना है या हार कर बैठ जाना है। 

सर्वेक्षण बताता है कि शारीरिक व्याधियों की जड़ मानसिक व्याधियाँ हैं। जिसने मन को स्वस्थ रखना सीख लिया, जिसने मन को सावधान करना और विश्राम देना सीख लिया वह खुश रहने का कोई अवसर खाली नहीं जाने देता। अवचेतन स्वस्थ रहे इसके लिए चेतन को स्वस्थ रखना है। सपनों में वही आता है जो हम सोचते नहीं लेकिन हमारे अवचेतन में होता है। कुछ घटनाओं का कोलाज बन कर सपने मेें आता है। अवचेतन मन में ‘भानुमति का कुनबा’ बनता है। 

रात सोने से पहले एक ही बात दोहरानी है, ‘‘मैं स्वस्थ हूँ, मैं खुश हूँ, मैं खुशकिस्मत हूँ, मुझे सब प्यार करते हैं, मैं सबसे प्यार करता/करती हूँ।’’ 

प्रतिदिन की प्रार्थना स्वीकृत होती है, निश्चित ही स्वीकृत होती है। बस विश्वास बनाए रखना है। समय-धार के विपरीत जाना बुद्धिमत्ता नहीं। जीवन-मूल्यों के साथ जीना कठिन है लेकिन सामान्य है, प्राकृतिक है। इसी में मनुष्यता है। मनुष्य ही खुश रहते हैं, पशु नहीं। नकारात्मक प्रवृत्तियों के साथ जीना असामान्य, अप्राकृतिक, अमानवीय है। 

संतुलन अर्थात सामंजस्य सकारात्मकता का प्रवेश-द्वार है। एक-न-एक दिन आदत पड़ जाएगी सकारात्मक सोचने की, शुरू तो कीजिए। जिस क्षण से खुश रहने की आदत पड़ जाएगी उस क्षण से जीवन खूबसूरत लगने लगेगा।

तो बंधु ! शांत रहो, खुश रहो।

-डॉ अंजु दुआ जैमिनी

(खुशी का ओटीपी पुस्तक से उद्धृत)

शुक्रवार, 12 सितंबर 2025

क्षणिका

 


क्षणिकाएँ


1.

 सावन की टूटी जो चप्पल

 गाँठ न पाया बादल

 बह गई चमड़ी सड़क की

 ढह गए बसेरे जलसमाधि लिए 

असमय समाए काल के गाल में 

परिंदे, पशु, पहाड़, परिवार 

'अब किस काम की दें उसे मजूरी'

मंत्रणा कर रही मिट्टी अपने गुप्तचरों से।


2.

कितनी करती प्रार्थना

कितने ही हाथ जोड़े तेरे सामने-

'मेरे फूलों में सुगन्ध भर दे प्रभु!'

जब कई महीनों तक 

नहीं बही खुशबूदार बयार 

तो थक-हारकर बदल ली मैंने प्रार्थना-

'धन्यवाद प्रभु ! 

भर दिया मेरा घर-आँगन तूने 

सुगंधित रंग-बिरंगे फूलों से' 

और सचमुच मैं तैरने लगी 

खुशबुओं के समन्दर में।


3.

क्षण-प्रतिक्षण कोसने वालों को 

गरियाने-गलियाने वालों को

 मेरा एक संदेश-

'नाराजगी नास्तिकों का मुख्य गुण होता है।'


4.

प्रवंचना प्रवचन का विलोम हो सकता है

पुरस्कार तिरस्कार का विपरीत हो सकता है अंधकार उजाला का विपरीत हो सकता है

लेकिन ईश्वर का विपरीत क्या है, 

सोचा है कभी?


5.

 सोचने में क्या ही जाता है

 कि जो होगा, देखा जाएगा

 जो मिलेगा, रख लेंगे 

 जो दुखेगा, सह लेंगे

 जिस हाल में वह रखेगा, रह लेंगे 

वस्तुतः होता ऐसा है

कि जब होता है तो सहा नहीं जाता।


6.

इन तरंगों से 

ठन जाती है मेरी जब भी 

मुँह की खाती हैं और खिलाती भी हैं

सच कहूँ तो अब इनसे उलझने की 

हो गई है कुछ आदत सी 

और जिस दिन नहीं आती मेरे रास्ते में 

उस दिन अनमनाई रहती हूँ मैं।


7.

सफेद टोपी हो या हो सफेद कोट

 काली पैंट हो या हो काला कोट

 सफेद बनियान हो या हो सफेद साड़ी

 सभी जबरदस्त आदी हो गए हैं 

सफेद झूठ बोलने के 

और काले कारनामे करने के।


8.

मैं जब से अपने अजीजों को

कफन में देखने लगी हूँ 

तब से अपनी देह से निवेदन करती हूँ-

'चुपचाप छोड़ देना मेरी रूह को 

नो मेडीसन, नो वेंटीलेटर।'


9.

यूँ कमरे के एक कोने में बैठकर

 कम्प्यूटर पर उंगलियाँ थिरकाने से

 जिन्दगी कोई गाइड नहीं थमाने वाली

 न देने वाली है टेन ईयर पेपर्स कोई

 बस पुस्तक पढ़ लो,

 किताब-कलम साथ रख लो।


10.

एक समय था,

सुनते थे राजस्थान सूखा प्रदेश है

एक समय था,

सुनते थे हरियाणा दूध-दही का खाणा

एक समय था.

सुनते थे राजा ने राक्षस को मारकर

राजकुमारी को अपनी रानी बना लिया

और एक समय है,

सुनते हैं, एक देश में

देशभक्त और ईमानदार लोग रहा करते थे।


-अंजु दुआ जैमिनी, फरीदाबाद (हरियाणा)

जानती हैं लड़कियाँ


 जानती हैं लड़कियाँ


जिस रोज ठानती हैं लड़कियाँ 

बहुत कुछ जानती हैं लड़कियाँ।


जलाने से पहले दीपक, 

बाती को तेल में डुबोना जानती हैं लड़कियाँ।


रोशन चरागों को करने का 

हुनर खूब जानती हैं लड़कियाँ।


फकत एक मौके की दरकार 

कमाना जानती हैं लड़कियाँ।


खण्डहरों को सँवार कर 

घर बनाना जानती हैं लड़कियाँ।


- डॉ अंजु दुआ जैमिनी

सोमवार, 8 सितंबर 2025

Journey of breath

 


JOURNEY OF BREATHS


Whether it be journey of breaths 

Or Journey of expressions of heart

 It moves along with You

 On zig-zag pathways 

Falling, standing on foot again

 Jumping at times, grizzling also

 Just Your fragrance prevails

 In each and every pore 

Strikes chords of heart

 Musical notes sways 

Steps are laid hither-thither

 Intoxication prevails all-around 

And entire life gets confined in

That single moment and stops there

 This cessation only moves along and

Journey continues with this halt With me and 

Me with You 

Only with You.


-Dr. Anju Dua Gemini

शनिवार, 6 सितंबर 2025

MUSICAL NOTE

 MUSICAL NOTE


One who touched my soul 


That moony 

The one that touched my forehead That vermilion


Land into fathomless depths

 And view, You are there

 Only You and me exist there

 You are my melodious musical note.


-Dr. Anju Dua Gemini

SILENCE

 


SILENCE


Set your ears aside 

Let them rest unhearing 

Veil your eyes 

With the cover of soft-lashes


Climb the stairs of breaths within Let yourself descend
And feel 
His presence divine.

-Dr. Anju Dua Gemini

FAR AWAY

 


FAR AWAY


What have we accomplished so far! 

Accumulated plenty of wealth

 But, hurt You 

Kept on stuffing our pockets


Claiming our religion, our caste Assert our superiority 

Arrogance, jealousy, greed, anger We got very far away from ourselves 

As well as from YOU.


-Dr. Anju Dua Gemini


8

BOTH ENDS


 BOTH ENDS


Kept holding 'The Word' whole night 

I keep looking for its lost end 

God knows, where it skipped


The moment I get both the ends Will tie my identity with Him

 And once I get tied 

Will get emancipation, 

Counting beads of rosary.


-Dr. Anju Dua Gemini

MY TIME, YOUR TIME

 


MY TIME, YOUR TIME


How do You foresee 

The trials I'll endure 

Guarding my future

 With watchful care 

You ease my worries, 

Make my heart pure


Though times of hardship

 You're always there

 I cannot grasp 

How swiftly trouble feed

 In Your embrace 

My fears are allayed.


-Dr. Anju Dua Gemini

शुक्रवार, 5 सितंबर 2025

Don't Persiflage

 


DON'T PERSIFLAGE

My beloved must have personated

I badly miss Him 

Soul never perishes 

Desire calls out in sleep


I abruptly get up from slumber Haunted by the reason of my existence 

O, My God! Don't persiflage 

Death embraces me, I welcome.

-Dr. Anju Dua Gemini

Without asking

 


WITHOUT ASKING


I understand what You convey

 But how can I, if would You don't say? 

You grasp the thoughts I never share Yet how, I see You as divine & rare?


You bestow Your blessings, 

Without my asking 

Then, O, Dear! Why should I ask?

 I am not capable of giving You anything

 I am fragment of You,

 I deem You Supreme.

-Dr. Anju Dua Gemini

Abode

 




ABODE

Noise of loneliness silenced
 When season encircled me
 My heart found its home
 In the depth of Yours
 And spread fragrance within

My heart chanted Your name Within Your heart, I made my abode 
With Your image in my heart
 We counted beads of
 Rosary of mutual love.

-Dr. Anju Dua Gemini


Question to God

 


QUESTION TO GOD


Countless praises lift You high Devotees gather underneath Your sky 

Some have their knives with deadly art 

Some pierce with daggers swift & smart


Some call You Allah, some Ishwar Some shout in high pitch-

'You are mine'

Terrorists too plead before You

You smile and laugh

 But not punish them

May I know, why?


-Dr. Anju Dua Gemini

You-. Merging with the Divine- Translated by Rajni Chhabra




1.
YOU

In flowing of waterfall
In the height of mountains
In chirpy sound echoing in a forest
In the depth of an ocean

In humming of bumble-bee
In fragrance of blossom
In hope, in morning, in glee
And in silence of mind
You're in all that I see.

- Dr. Anju Dua Gemini