क्षणिकाएँ
1.
सावन की टूटी जो चप्पल
गाँठ न पाया बादल
बह गई चमड़ी सड़क की
ढह गए बसेरे जलसमाधि लिए
असमय समाए काल के गाल में
परिंदे, पशु, पहाड़, परिवार
'अब किस काम की दें उसे मजूरी'
मंत्रणा कर रही मिट्टी अपने गुप्तचरों से।
2.
कितनी करती प्रार्थना
कितने ही हाथ जोड़े तेरे सामने-
'मेरे फूलों में सुगन्ध भर दे प्रभु!'
जब कई महीनों तक
नहीं बही खुशबूदार बयार
तो थक-हारकर बदल ली मैंने प्रार्थना-
'धन्यवाद प्रभु !
भर दिया मेरा घर-आँगन तूने
सुगंधित रंग-बिरंगे फूलों से'
और सचमुच मैं तैरने लगी
खुशबुओं के समन्दर में।
3.
क्षण-प्रतिक्षण कोसने वालों को
गरियाने-गलियाने वालों को
मेरा एक संदेश-
'नाराजगी नास्तिकों का मुख्य गुण होता है।'
4.
प्रवंचना प्रवचन का विलोम हो सकता है
पुरस्कार तिरस्कार का विपरीत हो सकता है अंधकार उजाला का विपरीत हो सकता है
लेकिन ईश्वर का विपरीत क्या है,
सोचा है कभी?
5.
सोचने में क्या ही जाता है
कि जो होगा, देखा जाएगा
जो मिलेगा, रख लेंगे
जो दुखेगा, सह लेंगे
जिस हाल में वह रखेगा, रह लेंगे
वस्तुतः होता ऐसा है
कि जब होता है तो सहा नहीं जाता।
6.
इन तरंगों से
ठन जाती है मेरी जब भी
मुँह की खाती हैं और खिलाती भी हैं
सच कहूँ तो अब इनसे उलझने की
हो गई है कुछ आदत सी
और जिस दिन नहीं आती मेरे रास्ते में
उस दिन अनमनाई रहती हूँ मैं।
7.
सफेद टोपी हो या हो सफेद कोट
काली पैंट हो या हो काला कोट
सफेद बनियान हो या हो सफेद साड़ी
सभी जबरदस्त आदी हो गए हैं
सफेद झूठ बोलने के
और काले कारनामे करने के।
8.
मैं जब से अपने अजीजों को
कफन में देखने लगी हूँ
तब से अपनी देह से निवेदन करती हूँ-
'चुपचाप छोड़ देना मेरी रूह को
नो मेडीसन, नो वेंटीलेटर।'
9.
यूँ कमरे के एक कोने में बैठकर
कम्प्यूटर पर उंगलियाँ थिरकाने से
जिन्दगी कोई गाइड नहीं थमाने वाली
न देने वाली है टेन ईयर पेपर्स कोई
बस पुस्तक पढ़ लो,
किताब-कलम साथ रख लो।
10.
एक समय था,
सुनते थे राजस्थान सूखा प्रदेश है
एक समय था,
सुनते थे हरियाणा दूध-दही का खाणा
एक समय था.
सुनते थे राजा ने राक्षस को मारकर
राजकुमारी को अपनी रानी बना लिया
और एक समय है,
सुनते हैं, एक देश में
देशभक्त और ईमानदार लोग रहा करते थे।
-अंजु दुआ जैमिनी, फरीदाबाद (हरियाणा)

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